दक्षिण भारत के पांच राज्यों में लोकतंत्र सेनानियों के लिए ₹30 हजार मासिक सम्मान निधि की मांग
Pratham Jhalak News
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बेंगलुरु/हैदराबाद/चेन्नई/अमरावती/तिरुवनंतपुरम।
हिमांशु जैन / आपातकाल (1975-77) के दौरान लोकतंत्र, संविधान और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए जेल गए लोगों को सम्मान निधि और अन्य सुविधाएं देने की मांग तेज हो गई है। राष्ट्र पुनर्निर्माण मिशन एवं भारतीय राजनीति संघ की ओर से कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल सरकारों को ज्ञापन भेजकर लोकतंत्र सेनानियों के लिए करीब ₹30,000 प्रतिमाह सम्मान निधि शुरू करने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में आपातकाल लागू रहा। इस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए बड़ी संख्या में लोगों को विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। संगठन ने ऐसे लोगों को लोकतंत्र सेनानी बताते हुए कहा कि उनके संघर्ष और त्याग को सम्मान मिलना चाहिए। ज्ञापन में दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार समेत कई राज्यों में आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को विभिन्न स्तर पर सम्मान निधि, चिकित्सा सुविधा और अन्य सम्मान दिए जा रहे हैं। इसी आधार पर दक्षिण भारत के पांच राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। राष्ट्र पुनर्निर्माण मिशन एवं भारतीय राजनीति संघ ने मांग रखी है कि कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में आपातकाल के दौरान मीसा या डीआईआर के अंतर्गत जेल गए लोगों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। पात्र लोकतंत्र सेनानियों को ₹30,000 प्रतिमाह सम्मान निधि देने के साथ उन्हें निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। ज्ञापन में लोकतंत्र सेनानियों के लिए बस और रेल यात्रा में निशुल्क सुविधा तथा सरकारी एवं राजकीय कार्यक्रमों में सम्मान देने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा जिन लोकतंत्र सेनानियों का निधन हो चुका है, उनके पति या पत्नी को भी पारिवारिक पेंशन के रूप में यह लाभ जारी रखने की मांग की गई है। संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक राज्य में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया है। समिति द्वारा पुराने सरकारी रिकॉर्ड, जेल रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पात्र लोगों की पहचान किए जाने की बात कही गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह मांग केवल आर्थिक सहायता से जुड़ी नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के सम्मान से संबंधित है। संगठन का कहना है कि सरकारों को इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए पात्र लोगों के लिए जल्द नीति और शासनादेश जारी करना चाहिए।
यह ज्ञापन धर्ममूर्ति / पंडित लक्ष्मण बालयोगी, सूत्रधार-राष्ट्र पुनर्निर्माण मिशन, केंद्रीय अध्यक्ष-भारतीय राजनीति संघ एवं मुख्य प्रशासकीय न्यासी-अटल बिहारी सेवाग्राम न्यास परिषद की ओर से प्रस्तुत किया गया है। संगठन ने पांचों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।