100 से ज्यादा बार एम्स के चक्कर, हर बार मिली अगली तारीख… आखिर बच्ची की जिंदगी ही खत्म हो गई!
Pratham Jhalak News
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वाह रे स्वास्थ्य व्यवस्था! लगता है व्यवस्था खुद बीमार है, जिसका इलाज करने वाला भी कोई नहीं
कोटा, राजस्थान की 15 वर्षीय तन्वी के दिल में छेद था। सर्जरी की उम्मीद लेकर उसका परिवार उसे 100 से ज्यादा बार एम्स दिल्ली लेकर आया, लेकिन हर बार कथित तौर पर इलाज की जगह अगली तारीख मिलती रही। परिवार उम्मीद के सहारे अस्पताल के चक्कर काटता रहा और बच्ची सर्जरी का इंतजार करती रही। 24 अगस्त को तन्वी रूटीन जांच के लिए एक बार फिर एम्स पहुंची, लेकिन वहां उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
अब परिवार की लाचारी और दर्द एक बड़ा सवाल पूछ रहा है अगर समय पर सर्जरी हो जाती, तो क्या आज तन्वी जिंदा होती? तारीख पर तारीख… इंतजार पर इंतजार… और आखिर में एक बच्ची की जिंदगी ही खत्म हो गई! यह सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य व्यवस्था की लाचारी पर गंभीर सवाल है, जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचता है और इंतजार करते-करते उसकी जिंदगी ही दांव पर लग जाती है। वाह रे स्वास्थ्य व्यवस्था! मरीजों का इलाज तो दूर, लगता है स्वास्थ्य व्यवस्था की खुद तबीयत खराब है और उसका इलाज करने वाला भी कोई नहीं!