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गुरु वाणी 22/08/2026 प्रवचन   दिल्ली ऋषभोदय ऋषभ विहार में विराजित दिगम्बर जैन तीर्थ-संस्कृति के उन्नायक पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा था -
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गुरु वाणी 22/08/2026 प्रवचन दिल्ली ऋषभोदय ऋषभ विहार में विराजित दिगम्बर जैन तीर्थ-संस्कृति के उन्नायक पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा था -

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•22 अगस्त 2026 को 10:32 am बजे•2 व्यूज़•1 मिनट पढ़ें

धर्म सर्वश्रेष्ठ है। धर्म सुख का साधन है। धर्म ही मंगल है, धर्म ही उत्तम है, धर्म ही शरण है। धर्म ही सुख-शांति का आधार है। धर्म ही सद्‌गति का साधन है। पुण्य कैसे बढ़ाएँ ?


पुण्य महा-शक्ति है। पुण्य-वल महा-बल है। पुण्य वरदान है। पुण्य कामधेनु गाय है। पुण्य कल्पवृक्ष के समान उपकारी है।

मानव को पुण्य बढ़ाने के लिए भगवान् की भक्ति करना चाहिए, सच्चे- गुरुओं की सेवा करो, सद-साहित्य का अध्ययन करो, प्राणियों पर दया करुणा केरो, सत्य-अहिंसा पूर्वक जीवन यापन करो, सुनियों (तपस्वियों) को आहार - औषधी दान करो।

योग्यता बढ़ाओ, सफलता पाओ

व्यक्ति को अपनी योग्यताएँ बढ़ाना चाहिए, जो योग्य होता है उसे योग्य-पद समय पर स्वयमेव ही प्राप्त हो जाता है। योग्यता जहाँ होती है, वहाँ सफलताएँ शीघ्र ही फलित होती हैं। योग्य व्यक्ति को ही योग्य-पद प्रदान करना चाहिए। अयोग्य व्यक्ति को उच्च पद नहीं देना चाहिए। अयोग्य व्यक्ति को उच्च पद प्राप्त हो भी जाए तो वह क्षीण लिया जाता है। सफलता पाना है, तो योग्यता प्राप्त करो। योग्यता ही उच्चता प्रदान करती हैं।
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