बुधवार, 2 सितंबर 2026
Englishहिन्दीاردو
प्रथम झलक न्यूज़
प्रथम झलक न्यूज़
होमई-पेपरवीडियोराष्ट्रीयदिल्लीराजनीतिव्यापारप्रौद्योगिकीखेलस्वास्थ्यशिक्षागौतम बुद्ध नगरभक्तिपूर्णअपराधउत्तर प्रदेश
टॉपराष्ट्रीयदिल्लीराजनीतिव्यापारप्रौद्योगिकीखेलस्वास्थ्यशिक्षागौतम बुद्ध नगरभक्तिपूर्णअपराधउत्तर प्रदेश

प्रथम झलक न्यूज़

हर खबर की पहली झलक

श्रेणियाँ

  • स्थानीय
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • व्यापार
  • प्रौद्योगिकी
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा

त्वरित लिंक

  • होम
  • ई-पेपर
  • वीडियो
  • आज की तस्वीर
  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • नियम और शर्तें

न्यूजरूम

  • संपादकीय नीति
  • सुधार और शिकायतें
  • विज्ञापन
  • न्यूजरूम संपर्क

भाषाएँ

  • English
  • हिन्दी (Hindi)
  • اردو (Urdu)

हमें फॉलो करें

Email: prathamjhalaknews@gmail.com

Phone: +91-7701824373

© 2026 Pratham Jhalak News. सर्वाधिकार सुरक्षित

Designed and Developed byZeloiteZeloite
दिल्ली, ऋषभोदय में विराजित दिगम्बर जैन श्रमण-संस्कृति के उन्नायक
  1. होम
  2. भक्तिपूर्ण
भक्तिपूर्ण

दिल्ली, ऋषभोदय में विराजित दिगम्बर जैन श्रमण-संस्कृति के उन्नायक

Pratham Jhalak News
•2 सितंबर 2026 को 04:44 pm बजे•20 व्यूज़•1 मिनट पढ़ें

पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा कि—

संयम जीवन का श्रृंगार

मनुष्य-जीवन का श्रेष्ठ-से-श्रेष्ठ कोई श्रृंगार है, वह शील-संयम है। संयम सुर-दुर्लभ है। संयम के लिए स्वर्ग के देव भी तरसते हैं। महा-पुरुष ही संयम को धारण कर शांति के पथिक बनते हैं। संयम सुख का साधन है। संयमी स्व-पर का कल्याणकारी होता है। प्राणियों की रक्षा करना प्राणी-संयम है, इन्द्रियों के भोगों से विरक्त होना, इन्द्रिय-संयम है।

संसार भ्रमण से बचो, भव समुद्र पार करो

अनादि काल से संसारी प्राणी अविद्या, मोह, राग-द्वेष के वश, दुःखी होता हुआ संसार-समुद्र में गोते लगा रहा है एवं मनुष्य देह, नरक एवं तिर्यंच सभी चतुर्गति में कष्ट प्राप्त करते हुए भ्रमण कर रहा है।

शाश्वत-सुख-शांति, आनंद प्राप्त करना है तो राग-द्वेष छोड़कर यथार्थ तत्त्व-बोध करके, आत्मशोध का पुरुषार्थ करना चाहिए। शांति चाहिये तो संसार भ्रमण से बचो, भव समुद्र से पार होकर, आवागमन पर विराम करो।

भगवत्-भक्ति, सुखों की दातार

प्रभु भक्ति से ही पुण्य वर्धमान होता है। प्रभु भक्ति से पाप का क्षय होता है। प्रभु भक्ति आनंद प्रदान करती है। भक्ति ही मुक्ति का आधार है। प्रभु भक्ति से ही संसार के सर्व-सुख प्राप्त होते हैं
साझा करें:

Pratham Jhalak News

अनुभवी पत्रकार और लेखक

More from भक्तिपूर्ण

 जैन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी “पारसनाथ पर्वतराज” की पवित्रता एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता*
भक्तिपूर्ण

जैन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी “पारसनाथ पर्वतराज” की पवित्रता एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता*

2 सित॰ 2026
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर शाहदरा जिला भाजपा का भव्य आयोजन
भक्तिपूर्ण

संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती पर शाहदरा जिला भाजपा का भव्य आयोजन

24 अग॰ 2026
संत समाज का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा : मुख्यमंत्री,
भक्तिपूर्ण

संत समाज का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा : मुख्यमंत्री,

22 अग॰ 2026
गुरु वाणी 22/08/2026 प्रवचन   दिल्ली ऋषभोदय ऋषभ विहार में विराजित दिगम्बर जैन तीर्थ-संस्कृति के उन्नायक पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा था -
भक्तिपूर्ण

गुरु वाणी 22/08/2026 प्रवचन दिल्ली ऋषभोदय ऋषभ विहार में विराजित दिगम्बर जैन तीर्थ-संस्कृति के उन्नायक पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्म-सभा में सम्बोधन करते हुए कहा था -

22 अग॰ 2026
सल्लेखना-मृत्यु: महोत्सव
भक्तिपूर्ण

सल्लेखना-मृत्यु: महोत्सव

22 अग॰ 2026