विश्व जैन संगठन ने केंद्रीय वन मंत्रालय, झारखंड सरकार एवं संबंधित प्रशासन से श्री सम्मेद शिखर जी
Pratham Jhalak News
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पारसनाथ पर्वतराज की पवित्रता, पर्यावरण एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं
हिमांशु जैन 1. प्रवेश द्वार पर पंजीकरण व्यवस्था: पर्वतराज में प्रवेश करने वाले प्रत्येक यात्री का विधिवत पंजीकरण किया जाए, ताकि सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर हो सके।
2.सामान जांच हेतु चेक पोस्ट: प्रवेश द्वार पर स्कैनर, बैरियर एवं आवश्यक सुरक्षा उपकरणों से युक्त सामान जांच चेक पोस्ट स्थापित किया जाए।
3.सीसीटीवी कैमरों की स्थापना: पर्वतराज के प्रवेश मार्ग एवं महत्वपूर्ण स्थानों पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
4.वंदना मार्ग को अतिक्रमण मुक्त किया जाए: वंदना मार्ग पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाकर श्रद्धालुओं के सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए।
5.बाइक एवं अन्य वाहनों पर नियंत्रण: पर्वतराज की धार्मिक एवं प्राकृतिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए वंदना मार्ग पर बाइक संचालन एवं अनावश्यक वाहनों के आवागमन पर प्रभावी प्रतिबंध लगाया जाए।
6.नशे पर पूर्ण प्रतिबंध: पर्वतराज क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई हो। प्लास्टिक सामग्री पर रोक: पर्यावरण संरक्षण के लिए
7.पर्वतराज क्षेत्र में प्लास्टिक एवं अन्य प्रतिबंधित सामग्री के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए। फिल्मी गानों पर रील/वीडियो बनाने पर रोक: तीर्थराज की धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए फिल्मी गानों पर अशोभनीय या गैर-धार्मिक वीडियो एवं रील बनाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
8.स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण: पर्वतराज क्षेत्र में नियमित स्वच्छता, कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
9.धार्मिक मर्यादा संबंधी सूचना बोर्ड: प्रवेश द्वार एवं वंदना मार्ग पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, जिनमें तीर्थ की धार्मिक महत्ता, पर्यावरण संरक्षण तथा आचार-संहिता की जानकारी दी जाए।
10.श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था: वंदना मार्ग पर आवश्यक स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों एवं आपातकालीन सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
11.प्रशासन एवं जैन समाज के बीच समन्वय: तीर्थराज की व्यवस्था एवं संरक्षण से जुड़े विषयों पर प्रशासन और जैन समाज के प्रतिनिधियों के बीच नियमित संवाद एवं समन्वय की व्यवस्था बनाई जाए।
12.विश्व जैन संगठन ने स्पष्ट किया कि इन मांगों का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था, स्थानीय समाज अथवा किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि श्री सम्मेद शिखर जी की धार्मिक पवित्रता, प्राकृतिक पर्यावरण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।